Friday, January 30, 2026

आईआईटी जोधपुर में समावेशी डिज़ाइन पर शोध:

 शिक्षा मंत्रालय//प्रविष्टि तिथि: 30 January 2026 at 6:00 PM by PIB Jaipur

इस क्षेत्र में हो रहा है बहुत सा काम 

आईआईटी जोधपुर में समावेशी डिज़ाइन पर शोध: खेलों और AR, VR व MR तकनीकों से सीखने और पुनर्वास को बनाया जा रहा अनुभवात्मक IIT जोधपुर की इंटरऐक्ट लैब ऐसे मानव-केंद्रित तकनीकी समाधान विकसित कर रही है, जो सीखने, पुनर्वास और डिजिटल अनुभवों को अधिक समावेशी, सहज और सशक्त बनाते हैं। 


जोधपुर
: 30 जनवरी 2026: (PIB Jaipur//राजस्थान स्क्रीन डैस्क)::

क्या उभरती हुई तकनीकें सभी के लिए सीखने को आसान बना सकती हैं? क्या डिजिटल उपकरण दिव्यांगजनों की अधिक प्रभावी सहायता कर सकते हैं? क्या तकनीक के साथ हमारा संवाद इतना सहज हो सकता है कि वह रोज़मर्रा के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन जाए?

इन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजने का कार्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन स्थित इंटरैक्शन एंड क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (InterACT) लैब में किया जा रहा है।

InterACT लैब का उद्देश्य ऐसे सरल, उपयोगकर्ता-अनुकूल और समावेशी तकनीकी समाधान विकसित करना है, जो सीखने, पुनर्वास और मानव–डिजिटल संवाद को बेहतर बना सकें। इस शोध कार्य का नेतृत्व डॉ. प्रांजल प्रतिम बड़ा, सहायक प्राध्यापक, स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन, IIT जोधपुर कर रहे हैं। उनका मानना है कि तकनीक को लोगों के अनुसार ढलना चाहिए, न कि लोगों को तकनीक के अनुसार।

डॉ. बड़ा कहते हैं, “तकनीक को लोगों के अनुरूप होना चाहिए, न कि लोगों को तकनीक के अनुसार खुद को बदलने के लिए मजबूर करना चाहिए। InterACT लैब में हम वास्तविक जीवन की समस्याओं, मानवीय आवश्यकताओं और क्षमताओं को समझकर समाधान तैयार करते हैं।”

दो प्रमुख क्षेत्र, एक साझा लक्ष्य: समावेशी तकनीक

InterACT लैब का शोध दो मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिनका उद्देश्य मानव-केंद्रित डिज़ाइन के माध्यम से वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान करना है।

सहायक तकनीकों के माध्यम से सीखने और पुनर्वास को बेहतर बनाना

हालाँकि डिजिटल तकनीकों ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाया है, फिर भी कई लोग, विशेष रूप से दिव्यांगजन और सीमित संसाधनों वाले वर्ग, अब भी चुनौतियों का सामना करते हैं। InterACT लैब ऐसे उपयोगकर्ताओं के साथ मिलकर काम करती है, ताकि उनकी वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकें।

डॉ. बड़ा बताते हैं, “हम उपयोगकर्ताओं और अन्य हितधारकों के साथ सहानुभूति के साथ जुड़कर उनकी वास्तविक चुनौतियों, उनके मूल कारणों और ज़रूरतों को समझते हैं, और फिर चरणबद्ध तरीके से समाधान तैयार करते हैं। हमारा उद्देश्य ऐसी तकनीक बनाना है जो लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सके।”

लैब का एक प्रमुख कार्यक्षेत्र तकनीक-सहायित पुनर्वास है। इसमें स्पर्श और कंपन पर आधारित हैप्टिक तकनीक और खेल आधारित तरीकों के माध्यम से पुनर्वास को अधिक रोचक और आत्मनिर्भर बनाने पर काम किया जा रहा है।

SPARSH परियोजना के अंतर्गत ऐसे पहनने योग्य हैप्टिक उपकरण विकसित किए जा रहे हैं, जो दिव्यांगजनों और बुज़ुर्गों को प्रशिक्षण और पुनर्वास के दौरान स्थानिक समझ, क्षमताओं और आपसी संवाद को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं।

InterACT लैब कम लागत और सरल तकनीकों पर भी काम कर रही है। प्रोजेक्ट नाम्या के अंतर्गत एक लचीले, हाथ में पकड़े जाने वाले उपकरण का परीक्षण किया गया है, जो आकार में मोबाइल फोन जैसा है। इसकी मदद से दृष्टिबाधित और नेत्रहीन उपयोगकर्ता डिवाइस को मोड़कर ज्यामितीय आकृतियाँ बना सकते हैं, जिससे सीखना अधिक सहज और इंटरैक्टिव हो जाता है।

इसी तरह, प्रोजेक्ट गीता (GITA: Gyan In The Air) के तहत यह अध्ययन किया जा रहा है कि कैसे खेल और इमर्सिव तकनीकें, जैसे ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR) और मिक्स्ड रियलिटी (MR), विभिन्न क्षमताओं वाले शिक्षार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक रोचक और अनुभवात्मक बना सकती हैं।

तकनीक के साथ अधिक सहज और स्वाभाविक संवाद का डिज़ाइन

InterACT लैब का दूसरा प्रमुख क्षेत्र यह समझना है कि मनुष्य स्वाभाविक रूप से तकनीक से कैसे संवाद करता है, जैसे स्पर्श, इशारों, आवाज़, आँखों की गति और भौतिक वस्तुओं के माध्यम से। इसका उद्देश्य तकनीक के साथ संवाद को सरल, सहज और स्वाभाविक बनाना है।

डॉ. बड़ा कहते हैं,“हम चाहते हैं कि तकनीक के साथ हमारा संवाद प्राकृतिक लगे। इसके लिए हम ऐसे नए तरीकों पर काम कर रहे हैं, जो बिना किसी जटिलता के सहज अनुभव प्रदान करें।”

इस क्षेत्र में चल रहे शोध में इमर्सिव वातावरण में इशारों के माध्यम से संवाद शामिल है, जिससे उपयोगकर्ता डिजिटल प्रणालियों के साथ अधिक सहज और नियंत्रित महसूस कर सकें। इसके साथ ही, लैब राजस्थान की पारंपरिक कठपुतली कला (कठपुतली) को डिजिटल माध्यम में प्रस्तुत करने पर भी कार्य कर रही है, ताकि उभरती तकनीकों के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और प्रचार किया जा सके।

संवेदनशीलता और उद्देश्य के साथ तकनीक का डिज़ाइन

IIT जोधपुर की InterACT लैब अपने कार्यों के माध्यम से डिज़ाइन, तकनीक, समावेशन और संस्कृति को एक साथ जोड़ती है। सहायक उपकरणों और डिजिटल संवाद के नए तरीकों के विकास के ज़रिए लैब का लक्ष्य विभिन्न क्षमताओं वाले लोगों की स्वतंत्रता, पहुँच और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

डॉ. बड़ा कहते हैं, “हमारा लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जो लोगों को उनके दैनिक जीवन में सशक्त बनाए। हम एक ऐसे भविष्य की कल्पना करते हैं जहाँ तकनीकी समाधान और डिजिटल अनुभव सभी के लिए उपयोगी, सरल, समावेशी और अर्थपूर्ण हों।”

InterACT लैब, IIT जोधपुर के बारे में

IIT जोधपुर के स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन स्थित इंटरैक्शन एंड क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (InterACT) लैब सहायक तकनीक, इमर्सिव तकनीक, मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मानव–कंप्यूटर संवाद और समावेशी डिज़ाइन के क्षेत्र में कार्य करती है। यह लैब शिक्षा, पुनर्वास, डिजिटल अनुभवों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी वास्तविक समस्याओं के लिए व्यावहारिक और मानव-केंद्रित समाधान विकसित करती है, जिससे समानता, आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ावा मिलता है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
Office of IIT Connect, IIT जोधपुर
फोन: 0291-2801025
ईमेल: pro@iitj.ac.in

 

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Video:- Sparks of IIT Jodhpur- Dr. Pranjal Pratim Bada