Tuesday, March 31, 2026

गांव-किसान की समृद्धि से डाली जा रही सुदृढ़ भविष्य की नींव,

31 मार्च 2026, 01:46 PM

‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ और राज्य का अतिरिक्त प्रोत्साहन

‘वीबी-जी राम जी’ में सुरक्षित रोजगार के साथ टिकाऊ उत्पादकता,

विकसित देश-प्रदेश की दिशा में मील का पत्थर बन रहीं योजनाएं


जयपुर
: 31 मार्च 2026: (DIPR राजस्थान//राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनरूप विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान के संकल्प को सिद्धि की ओर ले जा रही है। चाहे ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ में एक कदम आगे बढ़ाते हुए सम्मान राशि को 6 हजार रुपए से 9 हजार रुपए करना हो या ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ अधिनियम। राजस्थान सरकार गांव और किसान को सुदृढ़ और समृद्ध करने का कार्य कर रही है। 

किसानों को केंद्र का सम्मान, तो राज्य में अतिरिक्त निधि

हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी की गई। जिसके तहत प्रदेश के 66 लाख 76 हजार से अधिक किसानों के खातों में 1 हजार 355 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी हस्तान्तरित की गई है। खास बात ये है कि जहां देश में किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में कुल 6 हजार रुपए की राशि किस्तों में हस्तांतरित की जा रही है। वहीं राजस्थान में मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत यह राशि 3 हजार रुपए बढ़ाकर किसानों को दी जा रही है। यानी प्रदेश के किसानों को कुल 9 हजार रुपए सम्मान निधि के रूप में प्राप्त हो रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने किसानों से वादा किया है कि इस सम्मान निधि की राशि को चरणबद्ध रूप से 12 हजार रुपए तक बढ़ाया जाएगा, जो किसानों के प्रति राज्य सरकार के सम्मान को दर्शाता है।

रिस्क फ्री कृषि और पशुपालन के लिए प्रोत्साहन

आर्थिक संबल देने के साथ ही राज्य सरकार की ओर से किसानों को रिस्क फ्री कृषि और पशुपालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2026-27 में कृषि बजट 1 लाख 19 हजार 408 करोड़ रुपये रखा गया है। प्रदेश में गेहूं के समर्थन मूल्य खरीद पर 150 रुपये के अतिरिक्त बोनस का प्रावधान है। वहीं अब तक 78 लाख से अधिक किसानों को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण उपलब्ध कराए गए हैं। तो फसल बीमा योजना में खराबे पर 6 हजार 473 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम राज्य में वितरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की बात की जाए, तो 16 लाख से अधिक पशुओं की निशुल्क बीमा पॉलिसी जारी की गई है, वहीं 536 मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन गांवों में सेवा दे रहे हैं। राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना में पशुपालकों को 1 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है।

टिकाऊ विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ‘वीबी-जी राम जी’

केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं राजस्थान में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार गांवों को आधुनिकीकरण के साथ मजबूत कर रही है। इसी क्रम में विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम ग्रामीण रोजगार की दिशा में किया गया एक महत्वपूर्ण बदलाव है। क्योंकि डिजिटाइजेशन के युग में पूर्ण जवाबदेही के साथ ग्रामीण आजीविका सुनिश्चित करना भविष्य के लिए नींव को मजबूत करना है। 

विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम के तहत रोजगार गारंटी को प्रति ग्रामीण परिवार बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। जिसमें ग्रामीण परिसंपत्तियों के टिकाऊ एवं उत्पादक कार्यों (जैसे जल सुरक्षा एवं जल से संबंधित कार्य, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना से जुड़े कार्य, आजीविका संबंधी अवसंरचना से संबंधित कार्य, प्रतिकूल मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्य) पर जोर दिया गया है। ताकि ग्रामीण रोजगार ना केवल सुरक्षित आय प्रदान करे, बल्कि टिकाऊ आजीविका, सुदृढ़ परिसंपत्तियों एवं दीर्घकालिक ग्रामीण समृद्धि में भी योगदान दे।

कृषि उत्पादकता के साथ श्रमिकों के हितों के बीच संतुलित समायोजन

सबसे खास बात यह है कि बुवाई और कटाई के सीजन के दौरान जब खेतों में मजदूरों की आवश्यकता ज्यादा होती है, तब मजदूर यह कार्य कर सकेंगे। इसके लिए एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की समेकित विराम अवधि अधिसूचित की गई है। जिसके तहत श्रमिकों को मिलने वाले कुल 125 दिनों के रोजगार का अधिकार यथावत बना रहेगा, जो शेष अवधि में पूर्ण किया जा सकेगा। इस महत्वपूर्ण बदलाव से कृषि उत्पादकता और श्रमिकों के हितों के बीच संतुलित समायोजन सुनिश्चित संभव हो रहा है। 

जब किसान की समृद्धि होगी, तभी गांव मजबूत बन सकेंगे और गांव के विकास के साथ ही राज्य और राष्ट्र को विकसित करने की नींव रखी जा सकेगी। ऐसे में सरकार की ओर से उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदम भविष्य की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। 

-------//नितेश/रूपांक्षा 


Monday, February 23, 2026

आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने खोजा मानव शरीर का ऐसा प्रोटीन

शिक्षा मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 23 FEB 2026 at 5:45 PM by PIB Jaipur

ऐसा प्रोटीन जो खतरनाक बैक्टीरियल बायोफिल्म को रोक सकता है-शोध PNAS में प्रकाशित

महत्वपूर्ण खोज: शरीर में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला प्रोटीन जिद्दी ई.कोलाई संक्रमण को रोक सकता है, बिना एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ाए


जयपुर: 23 फरवरी 2026: (PIB Jaipur//राजस्थान स्क्रीन डैस्क)::

Indian Institute of Technology Jodhpur (आईआईटी जोधपुर) के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने पाया है कि मानव शरीर में स्वाभाविक रूप से मौजूद एक प्रोटीन बैक्टीरिया द्वारा बनने वाली खतरनाक और अत्यधिक प्रतिरोधक बायोफिल्म को बनने से रोक सकता है। बायोफिल्म लंबे समय तक चलने वाले संक्रमण और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का एक प्रमुख कारण है।

यह शोध विश्व की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS), अमेरिका में प्रकाशित हुआ है।

🔬 शोध लेख

H. Agarwal, H. Ben, A. Chaini, B. Gurnani, N. Mukherjee, A. Pal, A.K. Upadhyaya, S. Ghosh, D. Kumar Sasmal, & N. Jain (2026).

β2-microglobulin inhibits Escherichia coli biofilm formation via selectively blocking curli assembly. Proc. Natl. Acad. Sci. U.S.A. 123 (8) e2515986123.

🔗 https://doi.org/10.1073/pnas.2515986123

बायोफिल्म क्या होती है?

जब हम बैक्टीरिया के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमें वे अकेले तैरते हुए कोशिकाओं की तरह दिखाई देते हैं। लेकिन वास्तव में कई बैक्टीरिया आपस में जुड़कर एक मजबूत परत बना लेते हैं, जिसे बायोफिल्म कहा जाता है।

यह बायोफिल्म एक तरह की सूक्ष्म “ढाल” होती है, जो प्रोटीन, शर्करा और डीएनए से मिलकर बनती है। यह बैक्टीरिया को बाहरी हमलों से बचाती है।

बायोफिल्म में मौजूद बैक्टीरिया सामान्य बैक्टीरिया की तुलना में 1,000 गुना अधिक एंटीबायोटिक प्रतिरोधी हो सकते हैं।

बायोफिल्म आमतौर पर इन जगहों पर पाई जाती है:

कैथेटर

कृत्रिम हृदय वाल्व

हड्डी के इम्प्लांट

पुराने और न भरने वाले घाव

ये लंबे समय तक चलने वाले संक्रमणों का कारण बनती हैं और वैश्विक स्तर पर एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की समस्या को बढ़ाती हैं।

शोध में क्या नई खोज हुई?

Escherichia coli (ई.कोलाई) में बायोफिल्म बनने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोटीन होता है, जिसे कर्ली (Curli) कहा जाता है। कर्ली एक ढांचे (scaffold) की तरह काम करता है, जिससे बैक्टीरिया सतह पर चिपकते हैं और एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

आईआईटी जोधपुर की टीम ने पाया कि मानव शरीर में मौजूद β2-माइक्रोग्लोब्यूलिन (β2m) नामक प्रोटीन इस प्रक्रिया को रोक सकता है।

यह प्रोटीन बैक्टीरिया को मारता नहीं है, बल्कि कर्ली के बनने की शुरुआती प्रक्रिया को ही रोक देता है। इससे बायोफिल्म बन ही नहीं पाती।

यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

यह सीधे बैक्टीरिया को मारने के बजाय उनकी सुरक्षा ढाल को कमजोर करता है।

इससे बैक्टीरिया में प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) विकसित होने की संभावना कम हो जाती है।

यह पारंपरिक एंटीबायोटिक से अलग और नया इलाज का रास्ता दिखाता है।

इसमें घाव भरने की क्षमता भी हो सकती है।

यह अध्ययन β2m की एक नई भूमिका को सामने लाता है, जो पहले केवल प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) से जुड़ा माना जाता था।

वैज्ञानिक की प्रतिक्रिया

इस शोध की प्रमुख वैज्ञानिक और संबंधित लेखक, डॉ. नेहा जैन, एसोसिएट प्रोफेसर, बायोसाइंस एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी जोधपुर ने कहा:

“बायोफिल्म लंबे समय तक चलने वाले संक्रमणों के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली से बचाती है। हमारे अध्ययन से पता चला है कि β2-माइक्रोग्लोब्यूलिन, जो मानव शरीर में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है, कर्ली के निर्माण को रोककर बायोफिल्म बनने से रोक सकता है। यह बैक्टीरिया को मारने के बजाय उनकी सुरक्षा संरचना को कमजोर करता है। इससे प्रतिरोध का खतरा कम होता है और शरीर की अपनी जैविक प्रणाली से प्रेरित नई चिकित्सा विकसित करने का रास्ता खुलता है।”

वैश्विक स्वास्थ्य के लिए नई दिशा

एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। पारंपरिक एंटीबायोटिक बैक्टीरिया को मारती हैं, लेकिन इससे समय के साथ प्रतिरोधी स्ट्रेन विकसित हो जाते हैं।

यह शोध एक समझदारी भरा विकल्प प्रस्तुत करता है:

बैक्टीरिया को मारने के बजाय उनकी सुरक्षा ढाल को तोड़कर उन्हें कमजोर किया जाए।

मानव शरीर में पहले से मौजूद अणुओं का उपयोग करके सुरक्षित और टिकाऊ उपचार विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

आईआईटी जोधपुर का यह अग्रणी शोध दिखाता है कि भारत में हो रहा अत्याधुनिक वैज्ञानिक कार्य वैश्विक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

पूर्ण विवरण के लिए, PNAS में प्रकाशित अध्ययन पढ़ें 🔗https://doi.org/10.1073/pnas.2515986123

यह अध्ययन Dr. Neha Jain के नेतृत्व में Indian Institute of Technology Jodhpur में किया गया, जिसमें बायोफिजिक्स, माइक्रोबायोलॉजी, स्ट्रक्चरल बायोलॉजी, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी तथा संक्रमण के पशु मॉडलों में विशेषज्ञता रखने वाले बहु-विषयी शोधकर्ताओं की टीम ने सहभागिता की।

इस सहयोगात्मक प्रयास में H. Agarwal, H. Ben, A. Chaini, B. Gurnani, N. Mukherjee, A. Pal, A.K. Upadhyaya, S. Ghosh, D. Kumar Sasmal तथा N. Jain शामिल रहे।

टीम ने उन्नत आणविक विश्लेषण, बायोफिल्म अध्ययन तथा यांत्रिक (मैकेनिस्टिक) जांच को समेकित करते हुए यह खोज की कि β2-माइक्रोग्लोब्युलिन किस प्रकार चयनात्मक रूप से Escherichia coli में करली (curli) असेंबली को अवरुद्ध करता है। उनका एकीकृत दृष्टिकोण — जो मूलभूत जीवविज्ञान से लेकर अनुप्रयुक्त (ट्रांसलेशनल) महत्व तक विस्तृत था — मानव प्रतिरक्षा प्रोटीन के इस पूर्व अज्ञात कार्य को उजागर करने में निर्णायक सिद्ध हुआ। यह अध्ययन वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों, जैसे एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध, से निपटने में सहयोगात्मक एवं अंतर्विषयी शोध की शक्ति को दर्शाता है।

(रिलीज़ आईडी: 2231822) 

Friday, January 30, 2026

आईआईटी जोधपुर में समावेशी डिज़ाइन पर शोध:

 शिक्षा मंत्रालय//प्रविष्टि तिथि: 30 January 2026 at 6:00 PM by PIB Jaipur

इस क्षेत्र में हो रहा है बहुत सा काम 

आईआईटी जोधपुर में समावेशी डिज़ाइन पर शोध: खेलों और AR, VR व MR तकनीकों से सीखने और पुनर्वास को बनाया जा रहा अनुभवात्मक IIT जोधपुर की इंटरऐक्ट लैब ऐसे मानव-केंद्रित तकनीकी समाधान विकसित कर रही है, जो सीखने, पुनर्वास और डिजिटल अनुभवों को अधिक समावेशी, सहज और सशक्त बनाते हैं। 


जोधपुर
: 30 जनवरी 2026: (PIB Jaipur//राजस्थान स्क्रीन डैस्क)::

क्या उभरती हुई तकनीकें सभी के लिए सीखने को आसान बना सकती हैं? क्या डिजिटल उपकरण दिव्यांगजनों की अधिक प्रभावी सहायता कर सकते हैंक्या तकनीक के साथ हमारा संवाद इतना सहज हो सकता है कि वह रोज़मर्रा के जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन जाए?

इन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब खोजने का कार्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन स्थित इंटरैक्शन एंड क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (InterACT) लैब में किया जा रहा है।

InterACT लैब का उद्देश्य ऐसे सरलउपयोगकर्ता-अनुकूल और समावेशी तकनीकी समाधान विकसित करना हैजो सीखनेपुनर्वास और मानव–डिजिटल संवाद को बेहतर बना सकें। इस शोध कार्य का नेतृत्व डॉ. प्रांजल प्रतिम बड़ासहायक प्राध्यापकस्कूल ऑफ़ डिज़ाइन, IIT जोधपुर कर रहे हैं। उनका मानना है कि तकनीक को लोगों के अनुसार ढलना चाहिएन कि लोगों को तकनीक के अनुसार।

डॉ. बड़ा कहते हैंतकनीक को लोगों के अनुरूप होना चाहिएन कि लोगों को तकनीक के अनुसार खुद को बदलने के लिए मजबूर करना चाहिए। InterACT लैब में हम वास्तविक जीवन की समस्याओंमानवीय आवश्यकताओं और क्षमताओं को समझकर समाधान तैयार करते हैं।”

दो प्रमुख क्षेत्रएक साझा लक्ष्य: समावेशी तकनीक

InterACT लैब का शोध दो मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित हैजिनका उद्देश्य मानव-केंद्रित डिज़ाइन के माध्यम से वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान करना है।

सहायक तकनीकों के माध्यम से सीखने और पुनर्वास को बेहतर बनाना

हालाँकि डिजिटल तकनीकों ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाया हैफिर भी कई लोग, विशेष रूप से दिव्यांगजन और सीमित संसाधनों वाले वर्ग, अब भी चुनौतियों का सामना करते हैं। InterACT लैब ऐसे उपयोगकर्ताओं के साथ मिलकर काम करती हैताकि उनकी वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकें।

डॉ. बड़ा बताते हैं, “हम उपयोगकर्ताओं और अन्य हितधारकों के साथ सहानुभूति के साथ जुड़कर उनकी वास्तविक चुनौतियोंउनके मूल कारणों और ज़रूरतों को समझते हैंऔर फिर चरणबद्ध तरीके से समाधान तैयार करते हैं। हमारा उद्देश्य ऐसी तकनीक बनाना है जो लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सके।”

लैब का एक प्रमुख कार्यक्षेत्र तकनीक-सहायित पुनर्वास है। इसमें स्पर्श और कंपन पर आधारित हैप्टिक तकनीक और खेल आधारित तरीकों के माध्यम से पुनर्वास को अधिक रोचक और आत्मनिर्भर बनाने पर काम किया जा रहा है।

SPARSH परियोजना के अंतर्गत ऐसे पहनने योग्य हैप्टिक उपकरण विकसित किए जा रहे हैंजो दिव्यांगजनों और बुज़ुर्गों को प्रशिक्षण और पुनर्वास के दौरान स्थानिक समझक्षमताओं और आपसी संवाद को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं।

InterACT लैब कम लागत और सरल तकनीकों पर भी काम कर रही है। प्रोजेक्ट नाम्या के अंतर्गत एक लचीलेहाथ में पकड़े जाने वाले उपकरण का परीक्षण किया गया हैजो आकार में मोबाइल फोन जैसा है। इसकी मदद से दृष्टिबाधित और नेत्रहीन उपयोगकर्ता डिवाइस को मोड़कर ज्यामितीय आकृतियाँ बना सकते हैंजिससे सीखना अधिक सहज और इंटरैक्टिव हो जाता है।

इसी तरहप्रोजेक्ट गीता (GITA: Gyan In The Air) के तहत यह अध्ययन किया जा रहा है कि कैसे खेल और इमर्सिव तकनीकें, जैसे ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR) और मिक्स्ड रियलिटी (MR), विभिन्न क्षमताओं वाले शिक्षार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक रोचक और अनुभवात्मक बना सकती हैं।

तकनीक के साथ अधिक सहज और स्वाभाविक संवाद का डिज़ाइन

InterACT लैब का दूसरा प्रमुख क्षेत्र यह समझना है कि मनुष्य स्वाभाविक रूप से तकनीक से कैसे संवाद करता है, जैसे स्पर्शइशारोंआवाज़आँखों की गति और भौतिक वस्तुओं के माध्यम से। इसका उद्देश्य तकनीक के साथ संवाद को सरलसहज और स्वाभाविक बनाना है।

डॉ. बड़ा कहते हैं,हम चाहते हैं कि तकनीक के साथ हमारा संवाद प्राकृतिक लगे। इसके लिए हम ऐसे नए तरीकों पर काम कर रहे हैंजो बिना किसी जटिलता के सहज अनुभव प्रदान करें।”

इस क्षेत्र में चल रहे शोध में इमर्सिव वातावरण में इशारों के माध्यम से संवाद शामिल हैजिससे उपयोगकर्ता डिजिटल प्रणालियों के साथ अधिक सहज और नियंत्रित महसूस कर सकें। इसके साथ हीलैब राजस्थान की पारंपरिक कठपुतली कला (कठपुतली) को डिजिटल माध्यम में प्रस्तुत करने पर भी कार्य कर रही हैताकि उभरती तकनीकों के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और प्रचार किया जा सके।

संवेदनशीलता और उद्देश्य के साथ तकनीक का डिज़ाइन

IIT जोधपुर की InterACT लैब अपने कार्यों के माध्यम से डिज़ाइनतकनीकसमावेशन और संस्कृति को एक साथ जोड़ती है। सहायक उपकरणों और डिजिटल संवाद के नए तरीकों के विकास के ज़रिए लैब का लक्ष्य विभिन्न क्षमताओं वाले लोगों की स्वतंत्रतापहुँच और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।

डॉ. बड़ा कहते हैं, “हमारा लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है जो लोगों को उनके दैनिक जीवन में सशक्त बनाए। हम एक ऐसे भविष्य की कल्पना करते हैं जहाँ तकनीकी समाधान और डिजिटल अनुभव सभी के लिए उपयोगीसरलसमावेशी और अर्थपूर्ण हों।”

InterACT लैब, IIT जोधपुर के बारे में

IIT जोधपुर के स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन स्थित इंटरैक्शन एंड क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (InterACT) लैब सहायक तकनीकइमर्सिव तकनीकमानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्तामानव–कंप्यूटर संवाद और समावेशी डिज़ाइन के क्षेत्र में कार्य करती है। यह लैब शिक्षापुनर्वासडिजिटल अनुभवों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी वास्तविक समस्याओं के लिए व्यावहारिक और मानव-केंद्रित समाधान विकसित करती हैजिससे समानताआत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ावा मिलता है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
Office of IIT Connect, IIT जोधपुर
फोन: 0291-2801025
ईमेल: pro@iitj.ac.in

 

  Video Byte and Photograph Link

Video:- Sparks of IIT Jodhpur- Dr. Pranjal Pratim Bada 

Tuesday, December 9, 2025

पांरपरिक चिकित्सा पर द्वितीय डब्ल्यूएचओ वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन

आयुष//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 09 December 2025 at 5:37PM by PIB Jaipur

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा दिनांक 17-19 दिसम्बर, 2025 को नई दिल्ली में विशेष आयोजन 


जयपुर: 09 दिसंबर 2025: (By PIB Jaipur//राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा दिनांक 17-19 दिसम्बर, 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में पांरपरिक चिकित्सा पर द्वितीय डब्ल्यूएचओ वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह जानकारी केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान में अनुसंधान अधिकारी, वैज्ञा.-2, प्रभारी अधिकारी डॉ. निधि महाजन ने जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। डॉ. महाजन ने बताया कि वर्ष 2023 में गुजरात में आयोजित पहले संस्करण के बाद, भारत पारंपरिक चिकित्सा पर दूसरे डब्ल्यूएचओ वैश्विक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत के "सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया:” के दृष्टिकोण के अनुरुप, मानवता के स्वास्थ्य, खुशी और भलाई के लिए पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने के सामूहिक वैश्विक प्रयास में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का विषय (थीम) “पुनः स्थापन करना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास” है। इस आयोजन में 100 से अधिक देशों के मंत्री, नीति निर्माता, वैश्विक स्वास्थ्य नेता, शोधकर्ता, विशेषज्ञ, उद्‌योग प्रतिनिधि और चिकित्सक एक साथ आएंगे। पारंपरिक चिकित्सा में भारत के वैश्विक नेतृत्व पर जोर देते हुए, डॉ. महाजन ने कहा कि आयुष प्रणालियाँ - आयुर्वेद, योग और नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी-सदियों से लोगों की सेवा कर रही हैं और आज दुनिया भर में समग्र स्वास्थ्य के लिए विश्वसनीय समाधान के रूप में पहचानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की साझेदारी में जामनगर, गुजरात में डबल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की स्थापना, भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाती है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सम्मेलन के समापन समारोह में आगमन की अपेक्षा है। यह शिखर सम्मेलन पारंपरिक, पूरक, एकीकृत और स्वदेशी दवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में साक्ष्य-आधारित, न्यायसंगत और टिकाऊ एकीकरण के लिए एक दशक लंबे रोडमैप को आकार देगा। शिखर सम्मेलन के दौरान “अश्वगंधाः पारंपरिक जान से वैश्विक प्रभाव तक - प्रमुख वैश्विक विशेषज्ञों के दृष्टिकोण" नामक एक केंद्रित पूरक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो अश्वगंधा की वैज्ञानिक समझ को गहरा करने के लिए प्रमुख शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और चिकित्सकों को एक साथ लाएगा। 

केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (मुख्यालय), एक स्वायत्त निकाय के रूप में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करती है, जो कि होम्योपैथी के क्षेत्र में भारत में एक शीर्ष अनुसंधान संगठन है। केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, होम्योपैथी के क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इसकी स्थापना 1978 में हुई और मुख्यालय नई दिल्ली में है।  इसका प्रमुख उद्देश्य होम्योपैथी के वैज्ञानिक सत्यापन और वैश्विक स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए उच्च गुणवता वाले अनुसंधान का कार्य करना, समन्वय करना और विकसित करना है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद अपने संस्थानों के समूह के माध्यम से पूरे भारत में बहु-केंद्रित अनुसंधान आयोजित करता है, जो कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंदित करता है। इनमें औषधि अनुसंधान, औषधि प्रमाणीकरण (स्वस्थ स्वयंसेवकों पर परीक्षण), होम्योपैथिक दवाओं का मानकीकरण, और उनके चिकित्सीय प्रभावों का नैदानिक सत्यापन शामिल है। इसके अतिरिक्त, परिषद विभिन्न रोगों के लिए होम्योपैथिक उपचार की प्रभावकारिता का आकलन करने के लिए कई ग्राहच्छिक नैदानिक परीक्षणों सहित नैदानिक अनुसंधान आयोजित करती है। 

ये परीक्षण पारंपरिक अवधारणाओं को आधुनिक वैज्ञानिक पद्‌धतियों के साथ एकीकृत करते हैं। परिषद मौलिक अनुसंधान में भी कार्यशील है, जो होम्योपैथिक सिद्‌धांतों के पीछे के मूल विज्ञान का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ सहयोग करती है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, स्वास्थ्य रक्षण कार्यक्रम, अनुसूचित जाति उप योजना स्वास्थ्य शिविरों आदि जैसी कई सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में भी सक्रिय योगदानकर्ता है। इस प्रकार, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, होम्योपैथी के लिए प्रमाणधारीत डेटा उत्पन्न करने और प्रकाशनों के माध्यम से अनुसंधान निष्कर्षों को प्रसारित करने के लिए अहम भूमिका निभाता है, जिससे अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों, दोनों से होम्योपैथी की गुणवत्ता और अनुप्रयोग को मजबूत किया जा सके। 

इस अवसर पर केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, जयपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. उत्तम सिंह ने बताया कि संस्थान की स्थापना 1979 में हुई। यह केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के तहत आयुष मंत्रालय का एक प्रमुख शोध संस्थान है। और NABH एवं लैब NABL प्रमाणित है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान को वर्ष 2025 में डॉ. सर्वपली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्‌यालय, जोधपुर से पीएचडी करवाने की मान्यता प्राप्त हुई है।

(रिलीज़ आईडी: 2200962) 

Saturday, November 29, 2025

अलवर की राजीविका बहनों से की मुलाक़ात

Rajasthan Jaipur//Alwar News on 29th November 2025 Regarding Women Empowerment

 केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने बताये सफलता के विशेष गुर 

उत्पादों के बाज़ारीकरण हेतु तीन स्तरीय रणनीति बनाने के निर्देश


जयपुर
//अलवर: 29 नवंबर 2025: (मीडिया लिंक रविंदर / /राजस्थान स्क्रीन डेस्क) ::

महिलाओं के बिना संसार भी नहीं चल सकता और घर परिवार भी। इसलिए महिलाएं घर बार और संसार को सफलता से चलाने के लिए स्वयं बढ़चढ़ कर आगे आ रही हैं। इस दिशा में समाज और सरकार दोनों ही महिलाओं के साथ आएं तो बात बहुत तेज़ी से बन जाएगी। सरकार महिलाओं को बता रही है कि किस तरह से महुला सशक्तिकरण हीसमाज को मज़बूत बना सकता है। 

इसी भावना और मकसद से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव से उनके नई दिल्ली स्थित आवास पर शनिवार को अलवर की राजीविका बहनों ने मुलाक़ात की। यह भेंट केंद्रीय मंत्री के विशेष निमंत्रण पर आयोजित की गई, जिसमें उन्होंने राजीविका बहनों के उत्पादों को देशभर में पहचान दिलाने और बेहतर बाज़ार उपलब्ध करवाने हेतु हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। यह सहयोग तेज़ी से उपलब्ध भी होने लगा है। 

इस भेंट में केंद्रीय मंत्री ने राजीविका बहनों के कार्यों की सराहना करते हुए राजीविका उत्पादों की स्पष्ट पहचान, उत्पादों के मूल्यवर्धन हेतु प्रशिक्षण की सुव्यवस्थित व्यवस्था, तैयार उत्पादों के लिए बेहतर बाज़ार एवं विपणन अवसर उपलब्ध करवाने हेतु तीन स्तरीय कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। इस कार्ययोजना के बहुत अच्छे परिणाम भी जल्द सामने आएंगे   

इसी दिशा में प्रशिक्षण और विपणन सहायता को प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने वी-शक्ति ट्रस्ट को भी विशेष दिशा-निर्देश प्रदान किए। साथ ही यह आश्वासन दिया कि विभिन्न विभागों को निर्देशित किया जाएगा कि वे राजीविका बहनों को उत्पाद विक्रय हेतु उपयुक्त स्थान उपलब्ध करवाएं। इस कदम से जल्द ही महिमा सशक्तिकरण में एक क्रांति आ जाएगी। 

इस सुअवसर पर राजीविका बहनों ने केंद्रीय मंत्री श्री यादव को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि अलवर सांसद खेल उत्सव तथा राजीविका–वी शक्ति मेले में भोजन उपलब्ध करवाने के अवसर से उन्हें लगभग 15 लाख रुपये का ऑर्डर प्राप्त हुआ तथा मेले में भी उनके उत्पादों की लाखों रुपये की बिक्री हुई। इससे समूहों को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी प्रगति मिली। इस सफलता का ेटासिक असर पूरे समाज पर पड़ेगा। 

अपनी इस मुलाक़ात के दौरान राजीविका बहनों ने श्री यादव को अपने हस्तनिर्मित “बाजरे के लड्डू” और “राजीविका बहनों की पाती” भेंट स्वरूप प्रस्तुत की, जिसे मंत्री जी ने उत्साहपूर्वक स्वीकार किया। गौरतलब है कि बाजरे के इन लडडुओं को स्वाद और सम्मान के क्षेत्र में बहुत महत्व हासिल है। 

यह मुलाक़ात राजीविका बहनों के लिए नई संभावनाओं और सशक्तिकरण के नए आयाम खोलने वाली साबित हुई। अच्छा हो अगर यह योजनाएं देश के कोने कोने में पहुंच जाएं। कोई भी महिला ,  कोई भी घर आर्थिकक तौर पर कमज़ोर न रहे। हर घर में खुशहाली हो और मां लक्ष्मी की कृपा रहे। 

——नेमीचंद / आशुतोष——   

Wednesday, October 1, 2025

ग्रामीण विकास मंत्री ने किया सुमंगल दीपावली मेला– 2025 का शुभारंभ

 RJPRD//1st October 2025//राजीविका

मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

*महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त मंच यह मेला-डॉ. किरोडी लाल 

*1 से 12 अक्टूबर तक इंदिरा गांधी पंचायती राज ग्रामीण विकास संस्थान परिसर में हो रहा आयोजन 

जयपुर: पहली अक्टूबर 2025: (मीडिया लिंक रविंदर//राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::


ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने  राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के सौजन्य से इंदिरा गांधी पंचायती राज सस्थान में आयोजित हो रहे सुमंगल दीपावली मेला–2025 का बुधवार को  शुभारंभ किया । उन्होंने कहा कि यह मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन, कला, संस्कृति और महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त मंच है जो ग्रामीण महिलाओं के जीवन में नई रोशनी लेकर आएगा।

डॉ. किरोड़ी ने कहा कि राजीविका ने प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और विपणन अवसर प्रदान कर ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाया है। आज ये महिलाएँ न केवल अपने परिवारों का संबल हैं बल्कि गाँव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रही हैं। उन्होंने मेले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से बात कर उनकी संख्या, लागत और आय के बारे में जानकारी ली। उन्होंने आमजन से इस मेले में अधिक से अधिक खरीदारी करने का आह्वान किया तथा कहा कि यहां से  खरीदा गया प्रत्येक उत्पाद केवल एक वस्तु नहीं बल्कि हमारी ग्रामीण बहनों की मेहनत और सपनों का प्रतीक है। उन्होंने अलवर के स्वयं सहायता समूह द्वारा लगाई गई स्टॉल से दीये खरीद कर यूपीआई से भुगतान किया। 

उल्लेखनीय है कि यह मेला 1 से 12 अक्टूबर तक इंदिरा गांधी पंचायती राज ग्रामीण विकास संस्थान परिसर जवाहर लाल नेहरू मार्ग जयपुर में प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। मेले में 65 हैंडीक्राफ्ट स्टॉल्स एवं 10 स्टॉल्स से सजा भव्य फूड कोर्ट आकर्षण के केंद्र हैं। यहाँ आगंतुकों को राजस्थान के विविध जिलों के हस्तनिर्मित उत्पाद और परम्परागत राजस्थानी व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर मिल रहा है।

मेले में जयपुर की ब्लू पॉटरी, सांगानेरी व बगरू प्रिंट, कोटा डोरिया साड़ी, सवाई माधोपुर की लाख की चूड़ियाँ, राजसमंद की मीनाकारी एवं मोलेला पॉटरी, बीकानेर के अचार व नमकीन, अलवर का टेराकोटा, भरतपुर के जूट उत्पाद, नागौर की कैर, सांगरी व कसूरी मेथी, बांसवाड़ा के तीर-कमान, श्रीगंगानगर के सॉफ्ट टॉयज, दौसा एवं जालोर की राजस्थानी जूतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

मेले में आगंतुक राजस्थानी भोजन दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी, बाजरे व ज्वार की रोटी, कढ़ी-पकोड़ी, घेवर, मालपुआ, फेणी और रबड़ी जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों का लुफ्त भी उठा रहे हैं।

इस अवसर पर राज्य मिशन निदेशक श्रीमती नेहा गिरि एवं परियोजना निदेशक (प्रशासन) श्रीमती प्रीति सिंह सहित  अन्य विभागीय अधिकारी और  स्वयं सहायता समूहों की महिलाए उपस्थिति रही।

———//नेमीचन्द—आशुतोष/ब्रजेश

Friday, September 26, 2025

कॉफी विद डीईओ निबंध प्रतियोगिता सफलता पूर्वक संपन्न

26 सितम्बर 2025 RJPRD News 

विजेताओं को जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा किया गया सम्मानित


अजमेर
: 26 सितम्बर 2025: (मीडिया लिंक रविंद्र//राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::

निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिले में मतदाता जागरूकता गतिविधियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विश्व साक्षरता दिवस 8 सितंबर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को शुक्रवार को सम्मानित किया गया। जिला निर्वाचन अधिकारी श्री लोकबंधु ने तीनों विजेताओं से संवाद करते हुए उनके साथ कॉफी विद डीईओ थीम पर कार्यक्रम में उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि स्वीप कॉलेज ईएलसी गतिविधि के अंतर्गत मतदाता शिक्षा महत्वपूर्ण है विषय पर यह निबंध प्रतियोगिता रखी गई थी। जिले के समस्त सरकारी एवं निजी महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया। विभिन्न महाविद्यालयों से प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। इस मंडल में महाविद्यालय स्तर की नोडल अधिकारी प्रोफेसर भारती प्रकाश, उप जिला निर्वाचन अधिकारी ज्योति ककवानी तथा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं स्वीप जिला नोडल अधिकारी श्री राम प्रकाश शामिल थे।

उन्होंने बताया कि निर्णायकों की समीक्षा के बाद प्रतियोगिता के परिणाम घोषित किए गए। इसमें सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के छात्र श्री विक्रम सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। रतनलाल कंवरलाल पाटनी कॉलेज किशनगढ़ की छात्रा समीक्षा टांक द्वितीय स्थान पर रही एवं राजकीय कन्या महाविद्यालय की छात्रा पायल कंवर ने तृतीय स्थान हासिल किया।

कार्यक्रम के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी श्री लोकबंधु ने विजेताओं को प्रशस्ति पत्र देकर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि युवा मतदाता जागरूकता के सशक्त माध्यम हैं। इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति विश्वास और जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की रचनात्मकता और सक्रियता की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी तरह से जुड़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर निर्णायक मंडल की सदस्य प्रोफेसर भारती प्रकाश सहित जिला निर्वाचन कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।