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Tuesday, December 9, 2025

पांरपरिक चिकित्सा पर द्वितीय डब्ल्यूएचओ वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन

आयुष//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 09 December 2025 at 5:37PM by PIB Jaipur

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा दिनांक 17-19 दिसम्बर, 2025 को नई दिल्ली में विशेष आयोजन 


जयपुर: 09 दिसंबर 2025: (By PIB Jaipur//राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा दिनांक 17-19 दिसम्बर, 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में पांरपरिक चिकित्सा पर द्वितीय डब्ल्यूएचओ वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। यह जानकारी केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान में अनुसंधान अधिकारी, वैज्ञा.-2, प्रभारी अधिकारी डॉ. निधि महाजन ने जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। डॉ. महाजन ने बताया कि वर्ष 2023 में गुजरात में आयोजित पहले संस्करण के बाद, भारत पारंपरिक चिकित्सा पर दूसरे डब्ल्यूएचओ वैश्विक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन भारत के "सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया:” के दृष्टिकोण के अनुरुप, मानवता के स्वास्थ्य, खुशी और भलाई के लिए पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने के सामूहिक वैश्विक प्रयास में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का विषय (थीम) “पुनः स्थापन करना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास” है। इस आयोजन में 100 से अधिक देशों के मंत्री, नीति निर्माता, वैश्विक स्वास्थ्य नेता, शोधकर्ता, विशेषज्ञ, उद्‌योग प्रतिनिधि और चिकित्सक एक साथ आएंगे। पारंपरिक चिकित्सा में भारत के वैश्विक नेतृत्व पर जोर देते हुए, डॉ. महाजन ने कहा कि आयुष प्रणालियाँ - आयुर्वेद, योग और नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी-सदियों से लोगों की सेवा कर रही हैं और आज दुनिया भर में समग्र स्वास्थ्य के लिए विश्वसनीय समाधान के रूप में पहचानी जाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की साझेदारी में जामनगर, गुजरात में डबल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की स्थापना, भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाती है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सम्मेलन के समापन समारोह में आगमन की अपेक्षा है। यह शिखर सम्मेलन पारंपरिक, पूरक, एकीकृत और स्वदेशी दवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में साक्ष्य-आधारित, न्यायसंगत और टिकाऊ एकीकरण के लिए एक दशक लंबे रोडमैप को आकार देगा। शिखर सम्मेलन के दौरान “अश्वगंधाः पारंपरिक जान से वैश्विक प्रभाव तक - प्रमुख वैश्विक विशेषज्ञों के दृष्टिकोण" नामक एक केंद्रित पूरक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो अश्वगंधा की वैज्ञानिक समझ को गहरा करने के लिए प्रमुख शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और चिकित्सकों को एक साथ लाएगा। 

केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (मुख्यालय), एक स्वायत्त निकाय के रूप में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन कार्य करती है, जो कि होम्योपैथी के क्षेत्र में भारत में एक शीर्ष अनुसंधान संगठन है। केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, होम्योपैथी के क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इसकी स्थापना 1978 में हुई और मुख्यालय नई दिल्ली में है।  इसका प्रमुख उद्देश्य होम्योपैथी के वैज्ञानिक सत्यापन और वैश्विक स्वीकृति सुनिश्चित करने के लिए उच्च गुणवता वाले अनुसंधान का कार्य करना, समन्वय करना और विकसित करना है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद अपने संस्थानों के समूह के माध्यम से पूरे भारत में बहु-केंद्रित अनुसंधान आयोजित करता है, जो कई प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंदित करता है। इनमें औषधि अनुसंधान, औषधि प्रमाणीकरण (स्वस्थ स्वयंसेवकों पर परीक्षण), होम्योपैथिक दवाओं का मानकीकरण, और उनके चिकित्सीय प्रभावों का नैदानिक सत्यापन शामिल है। इसके अतिरिक्त, परिषद विभिन्न रोगों के लिए होम्योपैथिक उपचार की प्रभावकारिता का आकलन करने के लिए कई ग्राहच्छिक नैदानिक परीक्षणों सहित नैदानिक अनुसंधान आयोजित करती है। 

ये परीक्षण पारंपरिक अवधारणाओं को आधुनिक वैज्ञानिक पद्‌धतियों के साथ एकीकृत करते हैं। परिषद मौलिक अनुसंधान में भी कार्यशील है, जो होम्योपैथिक सिद्‌धांतों के पीछे के मूल विज्ञान का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निकायों के साथ सहयोग करती है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, स्वास्थ्य रक्षण कार्यक्रम, अनुसूचित जाति उप योजना स्वास्थ्य शिविरों आदि जैसी कई सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों में भी सक्रिय योगदानकर्ता है। इस प्रकार, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, होम्योपैथी के लिए प्रमाणधारीत डेटा उत्पन्न करने और प्रकाशनों के माध्यम से अनुसंधान निष्कर्षों को प्रसारित करने के लिए अहम भूमिका निभाता है, जिससे अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य पहलों, दोनों से होम्योपैथी की गुणवत्ता और अनुप्रयोग को मजबूत किया जा सके। 

इस अवसर पर केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान, जयपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. उत्तम सिंह ने बताया कि संस्थान की स्थापना 1979 में हुई। यह केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के तहत आयुष मंत्रालय का एक प्रमुख शोध संस्थान है। और NABH एवं लैब NABL प्रमाणित है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान को वर्ष 2025 में डॉ. सर्वपली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्‌यालय, जोधपुर से पीएचडी करवाने की मान्यता प्राप्त हुई है।

(रिलीज़ आईडी: 2200962)