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Tuesday, March 31, 2026

गांव-किसान की समृद्धि से डाली जा रही सुदृढ़ भविष्य की नींव,

31 मार्च 2026, 01:46 PM

‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ और राज्य का अतिरिक्त प्रोत्साहन

‘वीबी-जी राम जी’ में सुरक्षित रोजगार के साथ टिकाऊ उत्पादकता,

विकसित देश-प्रदेश की दिशा में मील का पत्थर बन रहीं योजनाएं


जयपुर
: 31 मार्च 2026: (DIPR राजस्थान//राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनरूप विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान के संकल्प को सिद्धि की ओर ले जा रही है। चाहे ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ में एक कदम आगे बढ़ाते हुए सम्मान राशि को 6 हजार रुपए से 9 हजार रुपए करना हो या ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ अधिनियम। राजस्थान सरकार गांव और किसान को सुदृढ़ और समृद्ध करने का कार्य कर रही है। 

किसानों को केंद्र का सम्मान, तो राज्य में अतिरिक्त निधि

हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त जारी की गई। जिसके तहत प्रदेश के 66 लाख 76 हजार से अधिक किसानों के खातों में 1 हजार 355 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी हस्तान्तरित की गई है। खास बात ये है कि जहां देश में किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में कुल 6 हजार रुपए की राशि किस्तों में हस्तांतरित की जा रही है। वहीं राजस्थान में मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत यह राशि 3 हजार रुपए बढ़ाकर किसानों को दी जा रही है। यानी प्रदेश के किसानों को कुल 9 हजार रुपए सम्मान निधि के रूप में प्राप्त हो रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने किसानों से वादा किया है कि इस सम्मान निधि की राशि को चरणबद्ध रूप से 12 हजार रुपए तक बढ़ाया जाएगा, जो किसानों के प्रति राज्य सरकार के सम्मान को दर्शाता है।

रिस्क फ्री कृषि और पशुपालन के लिए प्रोत्साहन

आर्थिक संबल देने के साथ ही राज्य सरकार की ओर से किसानों को रिस्क फ्री कृषि और पशुपालन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2026-27 में कृषि बजट 1 लाख 19 हजार 408 करोड़ रुपये रखा गया है। प्रदेश में गेहूं के समर्थन मूल्य खरीद पर 150 रुपये के अतिरिक्त बोनस का प्रावधान है। वहीं अब तक 78 लाख से अधिक किसानों को 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण उपलब्ध कराए गए हैं। तो फसल बीमा योजना में खराबे पर 6 हजार 473 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम राज्य में वितरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की बात की जाए, तो 16 लाख से अधिक पशुओं की निशुल्क बीमा पॉलिसी जारी की गई है, वहीं 536 मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन गांवों में सेवा दे रहे हैं। राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना में पशुपालकों को 1 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है।

टिकाऊ विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव ‘वीबी-जी राम जी’

केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं राजस्थान में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार गांवों को आधुनिकीकरण के साथ मजबूत कर रही है। इसी क्रम में विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम ग्रामीण रोजगार की दिशा में किया गया एक महत्वपूर्ण बदलाव है। क्योंकि डिजिटाइजेशन के युग में पूर्ण जवाबदेही के साथ ग्रामीण आजीविका सुनिश्चित करना भविष्य के लिए नींव को मजबूत करना है। 

विकसित भारत-रोज़गार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम के तहत रोजगार गारंटी को प्रति ग्रामीण परिवार बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। जिसमें ग्रामीण परिसंपत्तियों के टिकाऊ एवं उत्पादक कार्यों (जैसे जल सुरक्षा एवं जल से संबंधित कार्य, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना से जुड़े कार्य, आजीविका संबंधी अवसंरचना से संबंधित कार्य, प्रतिकूल मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्य) पर जोर दिया गया है। ताकि ग्रामीण रोजगार ना केवल सुरक्षित आय प्रदान करे, बल्कि टिकाऊ आजीविका, सुदृढ़ परिसंपत्तियों एवं दीर्घकालिक ग्रामीण समृद्धि में भी योगदान दे।

कृषि उत्पादकता के साथ श्रमिकों के हितों के बीच संतुलित समायोजन

सबसे खास बात यह है कि बुवाई और कटाई के सीजन के दौरान जब खेतों में मजदूरों की आवश्यकता ज्यादा होती है, तब मजदूर यह कार्य कर सकेंगे। इसके लिए एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों की समेकित विराम अवधि अधिसूचित की गई है। जिसके तहत श्रमिकों को मिलने वाले कुल 125 दिनों के रोजगार का अधिकार यथावत बना रहेगा, जो शेष अवधि में पूर्ण किया जा सकेगा। इस महत्वपूर्ण बदलाव से कृषि उत्पादकता और श्रमिकों के हितों के बीच संतुलित समायोजन सुनिश्चित संभव हो रहा है। 

जब किसान की समृद्धि होगी, तभी गांव मजबूत बन सकेंगे और गांव के विकास के साथ ही राज्य और राष्ट्र को विकसित करने की नींव रखी जा सकेगी। ऐसे में सरकार की ओर से उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदम भविष्य की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। 

-------//नितेश/रूपांक्षा 


Wednesday, October 1, 2025

ग्रामीण विकास मंत्री ने किया सुमंगल दीपावली मेला– 2025 का शुभारंभ

 RJPRD//1st October 2025//राजीविका

मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक

*महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त मंच यह मेला-डॉ. किरोडी लाल 

*1 से 12 अक्टूबर तक इंदिरा गांधी पंचायती राज ग्रामीण विकास संस्थान परिसर में हो रहा आयोजन 

जयपुर: पहली अक्टूबर 2025: (मीडिया लिंक रविंदर//राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::


ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने  राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) के सौजन्य से इंदिरा गांधी पंचायती राज सस्थान में आयोजित हो रहे सुमंगल दीपावली मेला–2025 का बुधवार को  शुभारंभ किया । उन्होंने कहा कि यह मेला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के हुनर और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन, कला, संस्कृति और महिला सशक्तीकरण का एक सशक्त मंच है जो ग्रामीण महिलाओं के जीवन में नई रोशनी लेकर आएगा।

डॉ. किरोड़ी ने कहा कि राजीविका ने प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और विपणन अवसर प्रदान कर ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाया है। आज ये महिलाएँ न केवल अपने परिवारों का संबल हैं बल्कि गाँव की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रही हैं। उन्होंने मेले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से बात कर उनकी संख्या, लागत और आय के बारे में जानकारी ली। उन्होंने आमजन से इस मेले में अधिक से अधिक खरीदारी करने का आह्वान किया तथा कहा कि यहां से  खरीदा गया प्रत्येक उत्पाद केवल एक वस्तु नहीं बल्कि हमारी ग्रामीण बहनों की मेहनत और सपनों का प्रतीक है। उन्होंने अलवर के स्वयं सहायता समूह द्वारा लगाई गई स्टॉल से दीये खरीद कर यूपीआई से भुगतान किया। 

उल्लेखनीय है कि यह मेला 1 से 12 अक्टूबर तक इंदिरा गांधी पंचायती राज ग्रामीण विकास संस्थान परिसर जवाहर लाल नेहरू मार्ग जयपुर में प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। मेले में 65 हैंडीक्राफ्ट स्टॉल्स एवं 10 स्टॉल्स से सजा भव्य फूड कोर्ट आकर्षण के केंद्र हैं। यहाँ आगंतुकों को राजस्थान के विविध जिलों के हस्तनिर्मित उत्पाद और परम्परागत राजस्थानी व्यंजनों का आनंद लेने का अवसर मिल रहा है।

मेले में जयपुर की ब्लू पॉटरी, सांगानेरी व बगरू प्रिंट, कोटा डोरिया साड़ी, सवाई माधोपुर की लाख की चूड़ियाँ, राजसमंद की मीनाकारी एवं मोलेला पॉटरी, बीकानेर के अचार व नमकीन, अलवर का टेराकोटा, भरतपुर के जूट उत्पाद, नागौर की कैर, सांगरी व कसूरी मेथी, बांसवाड़ा के तीर-कमान, श्रीगंगानगर के सॉफ्ट टॉयज, दौसा एवं जालोर की राजस्थानी जूतियाँ विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

मेले में आगंतुक राजस्थानी भोजन दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी, बाजरे व ज्वार की रोटी, कढ़ी-पकोड़ी, घेवर, मालपुआ, फेणी और रबड़ी जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों का लुफ्त भी उठा रहे हैं।

इस अवसर पर राज्य मिशन निदेशक श्रीमती नेहा गिरि एवं परियोजना निदेशक (प्रशासन) श्रीमती प्रीति सिंह सहित  अन्य विभागीय अधिकारी और  स्वयं सहायता समूहों की महिलाए उपस्थिति रही।

———//नेमीचन्द—आशुतोष/ब्रजेश

Friday, September 26, 2025

कॉफी विद डीईओ निबंध प्रतियोगिता सफलता पूर्वक संपन्न

26 सितम्बर 2025 RJPRD News 

विजेताओं को जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा किया गया सम्मानित


अजमेर
: 26 सितम्बर 2025: (मीडिया लिंक रविंद्र//राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::

निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिले में मतदाता जागरूकता गतिविधियों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विश्व साक्षरता दिवस 8 सितंबर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को शुक्रवार को सम्मानित किया गया। जिला निर्वाचन अधिकारी श्री लोकबंधु ने तीनों विजेताओं से संवाद करते हुए उनके साथ कॉफी विद डीईओ थीम पर कार्यक्रम में उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि स्वीप कॉलेज ईएलसी गतिविधि के अंतर्गत मतदाता शिक्षा महत्वपूर्ण है विषय पर यह निबंध प्रतियोगिता रखी गई थी। जिले के समस्त सरकारी एवं निजी महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया। विभिन्न महाविद्यालयों से प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। इस मंडल में महाविद्यालय स्तर की नोडल अधिकारी प्रोफेसर भारती प्रकाश, उप जिला निर्वाचन अधिकारी ज्योति ककवानी तथा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं स्वीप जिला नोडल अधिकारी श्री राम प्रकाश शामिल थे।

उन्होंने बताया कि निर्णायकों की समीक्षा के बाद प्रतियोगिता के परिणाम घोषित किए गए। इसमें सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के छात्र श्री विक्रम सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। रतनलाल कंवरलाल पाटनी कॉलेज किशनगढ़ की छात्रा समीक्षा टांक द्वितीय स्थान पर रही एवं राजकीय कन्या महाविद्यालय की छात्रा पायल कंवर ने तृतीय स्थान हासिल किया।

कार्यक्रम के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी श्री लोकबंधु ने विजेताओं को प्रशस्ति पत्र देकर उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि युवा मतदाता जागरूकता के सशक्त माध्यम हैं। इस प्रकार की गतिविधियां विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति विश्वास और जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करती हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की रचनात्मकता और सक्रियता की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी तरह से जुड़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर निर्णायक मंडल की सदस्य प्रोफेसर भारती प्रकाश सहित जिला निर्वाचन कार्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

Tuesday, July 15, 2025

आज का समय स्किल, स्टार्ट्स अप और स्पोर्ट्स का अमृतकाल है

  From PRD Rajasthan on 15 Jul 2025 at 9:18 PM

--कर्नल राज्यवर्धन ने बताया मौजूदा दौर का सार और गुर 

-विश्व युवा कौशल दिवस-2025 पर युवाओं को मिला प्रेरणा और अवसर का नया संबल

जयपुर: 15 जुलाई 2025: (मीडिया लिंक 32//राजस्थान स्क्रीन डेस्क) ::


कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने
विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर प्रदेश के युवाओं को प्रेरणादायक संबोधन देते हुए कहा कि आज का समय  स्किल, स्टार्ट्स अप और स्पोर्ट्स का अमृतकाल है। युवाओं का कौशल ही भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।

उन्होंने बताया कि राज्य की कामकाजी आबादी अब कुल जनसंख्या का 63% हो चुकी है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश को देश का सबसे युवा और दक्ष राज्य बना सकती है।

उन्होंने कहा, “अगर इस जनशक्ति को सही दिशा और कौशल मिले तो यही भारत को नेतृत्व प्रदान करने वाली शक्ति बनेगी। हम कौशल को केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं बल्कि नौकरी देने की क्षमता का आधार मानते हैं।”

कर्नल राठौड़ ने जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष लगभग 3 लाख युवाओं को 663 कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है और 683 करोड़ रूपये से अधिक का कौशल भत्ता वितरित किया गया है।

उन्होंने कोलकाता के पिंटू पोहन की कहानी साझा की, जिन्होंने पान की दुकान चलाते हुए 12 उपन्यास और 200 से अधिक कहानियाँ लिखी। यह इस बात का प्रतीक है कि संकल्प, मेहनत और कौशल से हर परिस्थिति बदली जा सकती है।

कर्नल राठौड़ ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का उल्लेख करते हुए कहा कि 41 वर्षों बाद किसी भारतीय ने अंतरिक्ष  में जाकर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर  तिरंगा लहराया है, जो भारत सरकार की दूरदर्शिता और युवाओं में विश्वास का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “भारत के पास दो सबसे बड़ी ताकतें हैं — डेमोक्रेसी और डेमोग्राफी । आज दुनिया मानती है कि भारत के पास वह युवा शक्ति है जो वैश्विक नेतृत्व दे सकती है।”

इस अवसर पर मंच पर राज्य मंत्री श्री के.के. विश्नोई, श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामगोपाल सुथार, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संदीप वर्मा , आरएसएलडीसी के प्रबंध निदेशक श्री ऋषभ मंडल तथा महाप्रबंधक श्रीमती सुनीता यादव की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में एसोचेम , फिक्की जैसे प्रमुख औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि, कौशल क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधि, प्रशिक्षण संस्थान, विभिन्न हितधारक तथा आरएसएलडीसी के  अधिकारीगण उपस्थित रहे।

टीसीएस  का ‘कॅरियर क्रिएटर’ पोर्टल लॉन्च—

राइजिंग राजस्थान के तहत टाटा कन्सलटेंसी सर्विसेज के साथ हुए एमओयू  को धरातल पर उतारते हुए विश्व युवा कौशल दिवस के मौके पर टीसीएस का नवीनतम पोर्टल  ‘कॅरियर क्रिएटर’ लॉंन्च किया गया।

यह एक फ्री कॅरियर डिाकवरी एंड रेडीनेस पैकेज है, जो युवाओं को कॅरियर चयन, आत्म मूल्यांकन, स्किल गाइडेंस और डिजिटल टूल्स के माध्यम से तैयारी में मदद करेगा।

यह पोर्टल युवाओं को 21वीं सदी के कॅरियर लायक़ स्किल्स और सोच विकसित करने में सहायता करेगा।

प्रतिभाओं का सम्मान—

इस अवसर पर प्रदेश के उन स्किल आइकन्स, एनसीवीटी टॉपर्स एवं स्किल एम्बेसडर्स को  सम्मानित किया गया, जिन्होंने कौशल के क्षेत्र में राज्य और देश को गौरव दिलाया है।

सम्मानित युवाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर यह सिद्ध किया है कि समर्पण और स्किलिंग से कोई भी मंज़िल दूर नहीं।

राज्य मंत्री श्री के.के. विश्नोई ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने हेतु सतत प्रयासरत है। हम चाहते हैं कि राजस्थान का युवा सिर्फ देश में नहीं, दुनिया में अपनी पहचान बनाए।

आयोजन की व्यापकता—

कार्यक्रम में राज्य भर से आए युवाओं, आईटीआई प्रशिक्षुओं, ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स, कौशल विश्वविद्यालयों, औद्योगिक प्रतिनिधियों और विभिन्न साझेदार संस्थानों ने भाग लिया।

विभिन्न स्किल स्टॉल्स, लाइव डेमो, डिजिटल टेक्नोलॉजी प्रजेंटेशन, और काउंसलिंग बूथ्स के माध्यम से युवाओं को कौशल अवसर,एप्रेंटिसशिप और उद्यमिता से अवगत कराया गया।

आयोजन में स्किल्ड राजरस्थान के विज़न को लेकर जो ऊर्जा, भागीदारी और दिशा सामने आई, वह आने वाले वर्षों में राजस्थान को राष्ट्रीय कौशल मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में निर्णायक साबित होगी।

————//अमन​दीप/ब्रजेश 

Friday, June 23, 2023

राजस्थान के लोक गीत संगीत में एक विशेष जादू है

यह गीत संगीत मन की भाषा को बहुत खूबसूरती से सामने लाता है 


श्री गंगा नगर
: 23 जून 2023: (राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::

राजस्थान के लोकगीत और संगीत में कोई ऐसा जादू है जो उन लोगों को भी अपनी तरफ शिद्दत से आकर्षित करता है जिन्होंने इसे पहली बार सुना होता है। इस गीतन संगीत में एक अलग ही तरह का आकर्षण है जो आपको हर बोल के साथ अपना बनाता चला जाता है। हर शब्द मन में कुछ अहसास जगाता है। 

राजस्थान के लोकगीत और संगीत में छुपे हुए प्रभाव वास्तव में मानवीय अनुभव, सांस्कृतिक धार्मिकता और प्रकृति के साथ मिलकर एक विविधतापूर्ण और प्रशांत माहौल प्रदान करते हैं। इन गीतों के माध्यम से राजस्थानी जनता अपनी भूमिका, संस्कृति, प्रेम, गर्व और जीवन के विभिन्न पहलुओं को व्यक्त करती है। इन गीतों में राजस्थान के जनजीवन और सांस्कृति का भी अहसास होता है। इन गीतों को सुनते सुनते व्यक्ति राजस्थान के जनजीवन की  कथाओं में खो जाता है। इन गीतों की कल्पना ही राजस्थान के इतिहास में छुपी हुई बहादुरी का परिचय करवाने लगती है। इन्दगी के उसी रंग में रंगति हुई वहीँ पर ले जाती है।  

शायद इसकी एक वजह यह भी हो कि राजस्थान के लोक गीतों में सदियों से प्रचलित रागों और तालों का बहुत ही सूंदर  प्रयोग होता है। ये गीत आमतौर पर देसी भाषा में गाए जाते हैं और संगीत, ताल, गीतकारी और गायकी में स्थानीय परंपराओं का पालन करते हैं। जिस जिस ने भी इस गीत संगीत को कभी कभर भी सुना है वह इस बात को अच्छी तरह जनता समझता है। यहां कुछ प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीतों के उदाहरण दिए गए हैं:

बहुत से अन्य प्रेम गीतों की तरह "ओ राणी" भी काफी गाया जाता है। यह एक प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत है जिसमें प्रेम और प्रेमिका के बीच की कठिनाईयों को बहुत ही सुंदरता से ब्यान किया गया है। इसमें प्रेम की शिद्दत एक भी अहसास होता है और समाज से जुडी दीवारों का भी। समाज से संघर्ष करते हुए कैसे पाना है अपना प्रेम इसका अहसास करवाते हैं राजस्थानी गीत। 

इसी तरह "गोरी नागोरी"-यह एक राजस्थानी लोकगीत है जिसमें गोरा और नागोरी की प्रेम कहानी का वर्णन किया गया है। सभी विवादों के बावजूद इस गीत की जानीमानी गायका गोरी ने ख्याति की शिखरें छुई और बार बार छुईं। गोरी इन लोकगीतों के ज़रिए अपनी कला एयर गायन के प्रदर्शन को गांव की चौपाल से निकाल कर यूनिवर्स्टियों तक ले गई। गोरी नागौरी को बचपन से ही डांस में काफी रूचि थी। 9 वर्ष की उम्र में उन्होंने डांस सीखना शुरू कर दिया था। गौरतलब है कि वह अपने स्कूल में होने वाली डांस प्रतियोगिता में बढ़ चढ़-कर हिस्सा लिया करती थी। श्रोताओं और दर्शकों से मिलने वाली प्रशंसा के चलते वह अपनी कला में निखार लाती गई। जिस जिस बात को आम जनता पसंद करती रही हर उस बात गोरी नेअपनाया और अपनी कला में बहुत ही खूबसूरती से दिखाया।  वह राजस्थानी गीतों पर बोल्ड डांस करने के लिए फेमस हैं। उन्हें अक्सर कई मंचों पर बोल्ड डांस करते हुए देखा जाता है। वह हरियाणा की  सपना चौधरी की तरह राजस्थान में प्रसिद्ध है। वह राजस्थानी और हरियाणवी गानों पर अनोखे तरीके से डांस करती है। एक बार जब गोरी नागौरी ने टीवी पर शकीरा का डांस देखा तब वो उनसे इतनी प्रभावित हुईं कि, गोरी ने शकीरा के डांस स्टेप्स को फॉलो करना शुरु कर दिया। उनका डांस कोलंबिया की सिंगर-डांसर शकीरा से काफी मिलता जुलता है, इसलिए गोरी नागौरी को लोग राजस्थानी शकीरा कहकर भुलाते हैं।

एक और गीत "केसरिया बालम" भी बहुत लोकप्रिय हुआ है। इसकी भी अलग ही पहचान बनी हुई है। यह गीत राजस्थानी संगीत की प्रमुख पहचान माना जाता है। इसमें प्रेम के भाव को बहुत ही गहनता और संवेदना के साथ व्यक्त किया गया है और यह आमतौर पर सांगणेर शहर के नागरिकों द्वारा गाया जाता है। इसकी लोकप्रियता भी काफी रही है। 

प्रेम पर राजस्थान में बहुत कुछ लिखा और गाया गया है। लोकप्रिय गीतों में से एक गीत है-"गोरी तेरे जिया"- यह लोकगीत जैसलमेर क्षेत्र में प्रसिद्ध है और इसमें प्रेमिका को अपने प्रेमी के लिए विनती करते हुए व्यक्ति की भूमिका है। उस विनती और निवेदन में गज़ब की अभिव्यक्ति का अहसास होता है। तन के स्टेप्स मन के सभी उतराव चढ़ावों ओके दिखते हैं और महसूस भी करवाते हैं। 

कई लोक साज़ भी राजस्थानी गीत संगीत के प्रदर्शन के समय प्रयोग में लाए जाते हैं। राजस्थान के संगीत में धोल, नगाड़ा, सरंगी, शेनाई, मुरली, वीणा और खरताल जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग होता है। ये संगीत प्रशंसा गीत, भक्तिगीत, रागिनियों, आरतियों, ताराना और घूमरी जैसे विभिन्न प्रकारों में होता है। इन सभी से एक अलग सा ही रंग  बंधता चला जाता है। 

इन गीतों के गायन का मुख्य उद्देश्य संस्कृति की जागरूकता, मनोरंजन और जनता के बीच एक सामंजस्य बनाना है। राजस्थान के लोकगीत और संगीत को राजस्थानी संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है और इनका अद्यतन और संरक्षण संगीत प्रेमियों द्वारा किया जाता है।