Showing posts with label Rajasthan Music. Show all posts
Showing posts with label Rajasthan Music. Show all posts

Friday, January 17, 2025

"ब्लिट्ज़श्लैग 2025:

प्रविष्टि तिथि: 17 January 2025 at 5:10PM by PIB Jaipur

एमएनआईटी(MNIT) जयपुर का तीन दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव 'ड्रीमस्केप' थीम के साथ जगमगाएगा"

जयपुर: 17 जनवरी 2025:(PIB Jaipur//राजस्थान स्क्रीन डैस्क)::

ब्लिट्ज़श्लैग 2025 - मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) जयपुर का वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव 7 से 9 फरवरी 2025 तक आयोजित होगा | प्रोफेसर एन.पी. पाढ़ी , निदेशक, MNIT जयपुर के मार्गदर्शन में, ब्लिट्ज़श्लैग’25  पूरे देश से प्रतिभा, उत्साह और सांस्कृतिक श्रेष्ठता का उत्सव प्रदर्शित करने के लिए तैयार है। छात्र कल्याण की डीन प्रोफेसर कनुप्रिया सचदेव ने ब्लिट्ज़श्लैग के आयोजकों और प्रतिभागियों की सराहना करते हुए इस आयोजन को छात्रों के लिए प्रेरणादायक और यादगार बताया।

ब्लिट्ज़श्लैग अपनी भव्यता और ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है, और यह 50,000 से अधिक दर्शकों को आकर्षित करता है। यह क्षेत्र के सबसे बड़े  छात्र-आयोजित महोत्सव के रूप में चर्चित है । यह आयोजन संस्कृति, प्रतिभा और रचनात्मकता का संगम है, जो भारत के 100 से अधिक कॉलेजों के प्रतिभागियों को एकत्रित करता हैं।  महोत्सव के  प्रमुख प्रतियोगिताएं  जैसे बैटल ऑफ बैंड्स (Battle of Bands), राम्बा सम्बा (Ramba Samba), पनाश (PANACHE) और  ब्लिट्ज़ गॉट टैलेंट (Blitz got talent) के लिए पहले से ही तैयारियां  शुरू हो चुकी है, जिससे उत्सव का माहौल बन गया है और प्रतिभागियों और दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ गया है।

ब्लिट्ज़श्लैग 2025 में 100 से अधिक प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा,जिसमे प्रमुख रूप से लेखन कला, संगीत, नृत्य और नाटक शामिल रहेंगे। यह महोत्सव उभरते हुए प्रतिभाओं को अपनी कौशल और रचनात्मकता को  प्रदर्शित  करने का मंच प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, इस वर्ष का थीम "ड्रीमस्केप”: स्ट्रैंडेड बियोंड रियैलिटी (DREAMSCAPE": Stranded Beyond Reality) प्रतिभागियों को कला की नई दिशाओं की तरफ जाने के लिए प्रेरित करेगा। ब्लिट्जशलैग का एक प्रमुख आकर्षण हमेशा से ही उसकी प्रो नाइट्स(Pro nights) रही हैं। पिछले वर्षों में, अरमान मलिक, सचिन-जिगर, जावेद अली, अंकित तिवारी, शान, केके और कई दिग्ग्ज कलाकारों  ने अद्भुत प्रस्तुति  दी है।  इस वर्ष भी  ब्लिट्ज़श्लैग में भारत के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा अनमोल प्रस्तुतियाँ दी जाएँगी, जो एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करेगा।

(रिलीज़ आईडी: 2093784)


Friday, June 23, 2023

राजस्थान के लोक गीत संगीत में एक विशेष जादू है

यह गीत संगीत मन की भाषा को बहुत खूबसूरती से सामने लाता है 


श्री गंगा नगर
: 23 जून 2023: (राजस्थान स्क्रीन डेस्क)::

राजस्थान के लोकगीत और संगीत में कोई ऐसा जादू है जो उन लोगों को भी अपनी तरफ शिद्दत से आकर्षित करता है जिन्होंने इसे पहली बार सुना होता है। इस गीतन संगीत में एक अलग ही तरह का आकर्षण है जो आपको हर बोल के साथ अपना बनाता चला जाता है। हर शब्द मन में कुछ अहसास जगाता है। 

राजस्थान के लोकगीत और संगीत में छुपे हुए प्रभाव वास्तव में मानवीय अनुभव, सांस्कृतिक धार्मिकता और प्रकृति के साथ मिलकर एक विविधतापूर्ण और प्रशांत माहौल प्रदान करते हैं। इन गीतों के माध्यम से राजस्थानी जनता अपनी भूमिका, संस्कृति, प्रेम, गर्व और जीवन के विभिन्न पहलुओं को व्यक्त करती है। इन गीतों में राजस्थान के जनजीवन और सांस्कृति का भी अहसास होता है। इन गीतों को सुनते सुनते व्यक्ति राजस्थान के जनजीवन की  कथाओं में खो जाता है। इन गीतों की कल्पना ही राजस्थान के इतिहास में छुपी हुई बहादुरी का परिचय करवाने लगती है। इन्दगी के उसी रंग में रंगति हुई वहीँ पर ले जाती है।  

शायद इसकी एक वजह यह भी हो कि राजस्थान के लोक गीतों में सदियों से प्रचलित रागों और तालों का बहुत ही सूंदर  प्रयोग होता है। ये गीत आमतौर पर देसी भाषा में गाए जाते हैं और संगीत, ताल, गीतकारी और गायकी में स्थानीय परंपराओं का पालन करते हैं। जिस जिस ने भी इस गीत संगीत को कभी कभर भी सुना है वह इस बात को अच्छी तरह जनता समझता है। यहां कुछ प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीतों के उदाहरण दिए गए हैं:

बहुत से अन्य प्रेम गीतों की तरह "ओ राणी" भी काफी गाया जाता है। यह एक प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत है जिसमें प्रेम और प्रेमिका के बीच की कठिनाईयों को बहुत ही सुंदरता से ब्यान किया गया है। इसमें प्रेम की शिद्दत एक भी अहसास होता है और समाज से जुडी दीवारों का भी। समाज से संघर्ष करते हुए कैसे पाना है अपना प्रेम इसका अहसास करवाते हैं राजस्थानी गीत। 

इसी तरह "गोरी नागोरी"-यह एक राजस्थानी लोकगीत है जिसमें गोरा और नागोरी की प्रेम कहानी का वर्णन किया गया है। सभी विवादों के बावजूद इस गीत की जानीमानी गायका गोरी ने ख्याति की शिखरें छुई और बार बार छुईं। गोरी इन लोकगीतों के ज़रिए अपनी कला एयर गायन के प्रदर्शन को गांव की चौपाल से निकाल कर यूनिवर्स्टियों तक ले गई। गोरी नागौरी को बचपन से ही डांस में काफी रूचि थी। 9 वर्ष की उम्र में उन्होंने डांस सीखना शुरू कर दिया था। गौरतलब है कि वह अपने स्कूल में होने वाली डांस प्रतियोगिता में बढ़ चढ़-कर हिस्सा लिया करती थी। श्रोताओं और दर्शकों से मिलने वाली प्रशंसा के चलते वह अपनी कला में निखार लाती गई। जिस जिस बात को आम जनता पसंद करती रही हर उस बात गोरी नेअपनाया और अपनी कला में बहुत ही खूबसूरती से दिखाया।  वह राजस्थानी गीतों पर बोल्ड डांस करने के लिए फेमस हैं। उन्हें अक्सर कई मंचों पर बोल्ड डांस करते हुए देखा जाता है। वह हरियाणा की  सपना चौधरी की तरह राजस्थान में प्रसिद्ध है। वह राजस्थानी और हरियाणवी गानों पर अनोखे तरीके से डांस करती है। एक बार जब गोरी नागौरी ने टीवी पर शकीरा का डांस देखा तब वो उनसे इतनी प्रभावित हुईं कि, गोरी ने शकीरा के डांस स्टेप्स को फॉलो करना शुरु कर दिया। उनका डांस कोलंबिया की सिंगर-डांसर शकीरा से काफी मिलता जुलता है, इसलिए गोरी नागौरी को लोग राजस्थानी शकीरा कहकर भुलाते हैं।

एक और गीत "केसरिया बालम" भी बहुत लोकप्रिय हुआ है। इसकी भी अलग ही पहचान बनी हुई है। यह गीत राजस्थानी संगीत की प्रमुख पहचान माना जाता है। इसमें प्रेम के भाव को बहुत ही गहनता और संवेदना के साथ व्यक्त किया गया है और यह आमतौर पर सांगणेर शहर के नागरिकों द्वारा गाया जाता है। इसकी लोकप्रियता भी काफी रही है। 

प्रेम पर राजस्थान में बहुत कुछ लिखा और गाया गया है। लोकप्रिय गीतों में से एक गीत है-"गोरी तेरे जिया"- यह लोकगीत जैसलमेर क्षेत्र में प्रसिद्ध है और इसमें प्रेमिका को अपने प्रेमी के लिए विनती करते हुए व्यक्ति की भूमिका है। उस विनती और निवेदन में गज़ब की अभिव्यक्ति का अहसास होता है। तन के स्टेप्स मन के सभी उतराव चढ़ावों ओके दिखते हैं और महसूस भी करवाते हैं। 

कई लोक साज़ भी राजस्थानी गीत संगीत के प्रदर्शन के समय प्रयोग में लाए जाते हैं। राजस्थान के संगीत में धोल, नगाड़ा, सरंगी, शेनाई, मुरली, वीणा और खरताल जैसे वाद्य यंत्रों का उपयोग होता है। ये संगीत प्रशंसा गीत, भक्तिगीत, रागिनियों, आरतियों, ताराना और घूमरी जैसे विभिन्न प्रकारों में होता है। इन सभी से एक अलग सा ही रंग  बंधता चला जाता है। 

इन गीतों के गायन का मुख्य उद्देश्य संस्कृति की जागरूकता, मनोरंजन और जनता के बीच एक सामंजस्य बनाना है। राजस्थान के लोकगीत और संगीत को राजस्थानी संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है और इनका अद्यतन और संरक्षण संगीत प्रेमियों द्वारा किया जाता है।